गर्मी की छुट्टियां

  चलो चलें अब नानी घर



            


  बंदर बोला अपनी मां से,  सुन मम्मी अब जल्दी कर |
 बहुत दिनों से पड़े यहां हैं,  चलो चलें अब नानी घर ||

 मम्मी बोली बंटी बेटा,  पहले तू एक वादा कर |
 ना कूदेगा डाली डाली,  ना भागेगा इधर-उधर ||

 बंटी बोला मम्मी कुछ तो,  बात करो तुम समझ बूझ कर | 
जंगल के बाहर भी थोड़ा,  पता लगा तू सबके घर ||

  चुन्नू मुन्नू गोलू बंटी, भी जब जाते नानी घर |
 खूब मचाए मस्ती सुन लो,  उधम कर पूरे दिन भर ||

 खेले कूदे खाए पिए,  और मचाए हल्ला दिन भर |
 रात में जब वो सुने कहानी,  पेट दर्द हो हंस-हंसकर ||

 कुछ तो सोचो मैं बेचारा,  तो सचमुच का हूं बंदर |
 फिर कैसे ना कूदूं डाली,  और ना भागूं इधर-उधर ||

  मेरी  फितरत है नटखट,  फिर कैसे मैं जाऊं सुधर |
 इसीलिए सब शर्तें छोड़ो,  और बांधो बोरी बिस्तर ||  

बंदर बोला अपनी मां से,  सुन मम्मी अब जल्दी कर |
बहुत दिनों से यहां पड़े हैं, चलो चलें अब नानी घर ||

Writer - Mohini M Bajpai
Hindi Kavita/ 

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