ओ मेरी मां तू सुन मेरी बात!


 

 घुंघराले बाल

 इस कविता में एक मां और उसके उसके बच्चे के बीच की प्यारी सी बातचीत का वर्णन किया गया है पढ़िए और आनंद लीजिए! कविता का कौन सा भाव आपके मन को छूता है, कॉमेंट सेक्शन में मुझे बताइएगा, और अपने मित्रों और प्रियजनों के साथ भी शेयर कीजिए।

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ओ मेरी मां तू सुन मेरी बात,
खेलूँ अब मैं किसके साथ !
यह नकली सब खेल खिलौने,
ना बनती अब इनसे बात!!


तू तो जाती रोज बाजार,
रुपए लेकर एक हजार !
सब कुछ तू खरीद है लाती,
पर ना सुनती मेरी पुकार !


मैं ना मांगू बिस्किट टॉफी,
चॉकलेट महंगे उपहार !
मुझको लाकर दे बाजार से ,
छोटी सी बहना इस बार !!

मेरी गुल्लक में कुछ पैसे,
रखे हैं मैंने तैयार !
कुछ नई और दादी देगी,
कुछ पापा से लूंगा उधार!





इतने में तो मिल जाएगी,
जल्दी अब जा शॉपिंग मॉल!
ढूंढ के ऐसी बहना लाना,
हो घुंघराले जिसके बाल !!

संग में मेरे खेलेगी वो,
खायेगी और सोएगी !
दुलाराऊंगा प्यार करूंगा,
अगर कभी वह रोएगी!!


तुम ना उसकी चिंता करना,
ले लूंगा मैं सारा भार!
मुझको लाकर दे बाजार से,
छोटी सी बहना इस बार!!


मुझको लाकर दे बाजार से,
छोटी सी बहना इस बार!!
  


Written by:   Mohini M Bajpai (Not published yet)

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Tags: #हिंदी कविता #हिंदी बाल कविता #बाल साहित्य
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